लेखांकन की पारिभाषिक शब्दावली पार्ट 3 (Basic Terminology of accounting in hindi part 3 glossary of accounting terminology)

Basic Terminology of Accounting 

(लेखांकन की पारिभाषिक शब्दावली पार्ट 3)



Terminology Accounting in hindi part 3
Terminology Of Accounting Part 3

  • आप सभी का हमारे टैली के इस टुटोरिअल में स्वागत है इससे पिछले टुटोरिअल में हमने आपको लेखांकन की पारिभाषिक शब्दावली पार्ट 2 के बारे में जानकारी दी आज के इस टुटोरिअल में हम आपको पार्ट ३ के बारे में जानकारी देंगे।

  1. REVENUE:- राजस्व गुड्स या सर्विस को मार्किट में बेचने पर उससे जो प्राप्ति होती है वह Revenue यानि की राजस्व कहलाती है।
  2. INCOME:- (आय) किसी भी माल या सर्विस को मार्किट में सेल करने पर उससे जो राजस्व प्राप्त होता है उसमे से खर्चो को घटाने पर जो राशि बचती है उसे आय कहते है, यह दो प्रकार की हो सकती है

    (i) Direct Income (प्रत्य्क्ष आय)
    (ii) Indirect Income (अप्रत्क्ष आय)
  3. Direct Income:- वो आय है जो हमे मुख्य व्यवसाय से मिलती है मान लीजिये हमारी कोई दुकान है तो उससे प्राप्त होने वाली आय डायरेक्ट इनकम कह लाएगी। 

  4. Indirect Income:- मुख्य व्यवसाय के आलावा जो इनकम हमारी होती है वह indirect इनकम कहलाती है उदहारण के लिए हमारी कोई दुकान है उसके आलावा हमारे कुछ गोदाम किराये पर दिए हुए है तो उनका जो किराया आता है वो indirect इनकम कहलाती है।
  5. Discount:- बट्टा या छूट, व्यापारी द्वारा ग्राहकों को दी जाने वाली छूट या रियायत डिस्काउंट कहलाती है यह डिस्काउंट दो प्रकार का हो सकता है।

    (i) Trade Discount (व्यापारिक छूट)

    (ii) Cash Discount (नगद छूट)
  6. Trade Discount:- व्यापारी माल बेचते समय ग्राहक को माल के मूल्य में कुछ कमी या बिल की राशि में जो कमी करता है वह व्यापारिक छूट कहलाती है , यह छूट ग्राहकों को अधिक माल खरीदने के लिए प्रेरित करने के लिए दी जाती है, यह छूट वस्तु के विक्रय मूल्य में से निश्चित प्रतिसत के रूप में दी जाती है इस छूट को बिल में ही कम कर दिया जाता है।
  7. Cash Discount:- व्यापारिक चलन के अनुसार प्रत्येक ग्राहक को एक निश्चित अवधि में भुगतान करने की सुविधा प्रदान की जाती है अगर ग्राहक निश्चित अवधि के पहले ही भुगतान कर दे तो उसे कुछ छूट दी जाती है जिसे नगद छूट कहा जाता है, कैश डिस्काउंट के लिए ग्राहक शीग्र भुगतान करने के लिए प्रेरित होता है यह डिस्काउंट भी प्रतिसत के रूप में दी जाती है।
  8. Bad Debts (डूबत ऋण):- व्यापरी को उदार बेचे गए माल की पूरी रकम देनदारों से प्राप्त हो जाये यह आवश्क नहीं है, अत: इस उदार की रकम में से जो वस्तु वसूल नहीं हो पाती है उसे व्यापार का डूबत ऋण कहते है, उदहारण के लिए व्यापारी को मोनू से 100 रूपये लेने थे किन्तु मोनू के दिवालिया हो जाने से उसकी सम्पति से 400 रूपये ही वसूल हो सके ऐसी स्थिति में 600 रूपये डूबत ऋण होगा यह व्यापर के लिए हानि।
  9. Transaction (लेन देन):- व्यापर में माल संबधी क्रय विक्रय और वस्तुओ का पारस्परिक आदान प्रदान होता है ऐसे सभी लेन देन मुद्रा में होते है  या मुद्रा द्वारा मापे जा सकते है मुद्रा का भुगतान तुरंत या भविष्य में हो सकता है। व्यापारी द्वारा किये जाने वाले सभी आदान प्रदान लेन देन कहलाते हैजब सौदे का तुरंत भुगतान किया जाता है तब वह नकद  लेन देन कहलाता है और जब भुगतान भविष्य में किया जाता है तब उसे उदार लेन देन कहते है।

     
  10. Voucher (प्रमाणक):- व्यापार संबंधी सभी व्यवहारों व लेन देन के परमाणो के लिए जो दस्तावेज लिए या दिए जाते है उन्हें प्रमाणक कहते है। उदार क्रय विक्रय हेतु बिलों, रुपयों का लेन देन के लिए रसीदों, बैंको में जमा करने हेतु स्लिप व बैंक से रूपये निकलने हेतु चेक आदि सभी प्रमाणक कहलाते है इनका जरूरत पड़ने पर प्रमाण प्रस्तुत करने में उपयोग किया जाता है।


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